सहरसा।सावन की तीसरी सोमवारी पर जिले के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिषी स्थित प्रसिद्ध बाबा कारू खिरहर स्थान पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। महिषी प्रखंड स्थित बाबा कारू खिरहर स्थान कोसी अंचल के प्रमुख आस्था केंद्रों में माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार बाबा कारू खिरहर का जन्म 17वीं शताब्दी में हुआ था। उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का वंशज माना जाता है। मान्यता है कि वे महान योद्धा, शास्त्रों के ज्ञाता, गो-सेवक और भगवान भोलेनाथ के अनन्य भक्त थे।
दूध चढ़ाकर करते हैं दुग्धाभिषेक :- बाबा कारू खिरहर को गायों से विशेष प्रेम था। यही कारण है कि आज भी श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने और मवेशियों के कल्याण की कामना से बाबा के स्थान पर दूध अर्पित करते हैं। इसे दुग्धाभिषेक कहा जाता है। सावन के महीने में विशेषकर सोमवार को यहां कोसी अंचल के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। तीसरी सोमवारी पर कारू धाम में मेले जैसा माहौल रहा। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर का प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही।
सुबह से लगी रही लंबी कतार :- धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाने वाली तीसरी सोमवारी पर सुबह करीब पांच बजे शिवालयों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। भक्तों ने भगवान आशुतोष का जल, गंगाजल, कच्चे दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और शमी पत्र से अभिषेक किया। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने निर्जला या फलाहारी व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और शांति के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की। पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा।
